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एक लड़की भीगी भागी सी ...स्वर -अल्पना

गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी

Oct 14, 2017

तुम सो जाओ मैं गाऊँ !

तुम सो जाओ मैं गाऊँ !

कवयित्री- महादेवी वर्मा  जी
कविता पाठ : अल्पना वर्मा

तुम सो जाओ मैं गाऊँ ! मुझको सोते युग बीते, तुमको यों लोरी गाते; अब आओ मैं पलकों में स्वप्नों से सेज bichhaun ! प्रिय ! तेरे नभ-मंदिर के मणि-दीपक बुझ-बुझ जाते; जिनका कण कण विद्युत है मैं ऐसे प्राण जलाऊँ ! अपनी असीमता देखो, लघु दर्पण में पल भर तुम; मैं क्यों न यहाँ क्षण क्षण को धो धो कर मुकुर बनाऊँ ? ----------
शेष कविता :- क्यों जीवन के शूलों में प्रतिक्षण आते जाते हो ? ठहरो सुकुमार ! गला कर मोती पथ में फैलाऊँ ! पथ की रज में है अंकित तेरे पदचिह्न अपरिचित; मैं क्यों न इसे अंजन कर आँखों में आज बसाऊँ ! जब सौरभ फैलाता उर तब स्मृति जलती है तेरी; लोचन कर पानी पानी मैं क्यों न उसे सिंचवाऊँ । इन भूलों में मिल जाती, कलियां तेरी माला की; मैं क्यों न इन्ही काँटों का संचय जग को दे जाऊँ ? हंसने में छुप जाते तुम, रोने में वह सुधि आती; मैं क्यों न जगा अणु अणु को हंसना रोना सिखलाऊँ !
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Sep 30, 2017

लागी छूटे न ...फिल्म -काली टोपी लाल रुमाल

लागी छूटे न
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फिल्म -काली टोपी लाल रुमाल
संगीतकार -चित्रगुप्त
गीतकार-मजरूह
मूल गायक -रफ़ी और लता



       कवर प्रस्तुति -सफ़ीर और अल्पना
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    लागी छूटे ना अब तो सनम
 चाहे जाए जिया तेरी क़सम
 लागी छूटे ना ...

 तुझको पुकारे बन के दीवाना ना माने रे जिया --
        ओ जी हो
 प्यार किया तो करके निभाना सुनो जी रसिया
 ओ प्यार किया तो प्यार किया तेरी क़सम
 लागी छूटे ना ...
 दूर हूँ फिर भी दिल के क़रीब निशाना है तेरा
 सोच ले फिर से एक गरीब दीवाना है तेरा
 सोच लिया जी सोच लिया तेरी क़सम
 लागी छूटे ना ...

 जब से लड़ी है तुझसे निग़ाहें तड़प रहा दिल
 देख के चलना प्यार की राह बड़ी है मुश्किल
 देख लिया जी देख लिया तेरी क़सम
 लागी छूटे ना ...
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Sep 18, 2017

सम्पूर्ण बाल रामकथा -ध्वनि पुस्तक

सम्पूर्ण बाल रामकथा जो कि १२ खण्डों में यहाँ प्रस्तुत की जा रही है ,आशा है आपको पसंद आएगी .
ये कथा महर्षि वाल्मीकि जी के द्वारा लिखी रामायण पर ही आधारित है ,जिसे मधुकर उपाध्याय जी ने बड़े ही सरल शब्दों में संक्षेप में लिखा है .यह विशेष रूप से बच्चों के लिए ही लिखी गयी है ,लेकिन जिन्होंने पढ़ी नहीं उनके लिए भी लाभकारी होगी ,थोड़े समय में पूरी कहानी को जान लेने का बेहतर उपाय .
प्रस्तुत है बाल रामकथा  -:
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Aug 27, 2017

ओ घटा साँवरी -फिल्म-अभिनेत्री

फिल्म-अभिनेत्री
मूल गायिका -लता मंगेशकर
संगीतकार-लक्ष्मीकांत -प्यारेलाल
गीतकार -मजरूह सुल्तानपुरी
प्रस्तुत गीत में स्वर -अल्पना वर्मा
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गीत -
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ओ घटा साँवरी, थोड़ी थोड़ी बावरी, हो गयी हैं बरसात क्या!
हर साँस है बहकी हुई, अब की बरस है ये बात क्या!
हर बात है बहकी हुई, अब की बरस  है ये बात क्या!

1-पा के अकेली मुझे, मेरा आँचल मेरे साथ उलझे
छू ले अचानक कोई, लट में ऐसे मेरा हाथ उलझे
क्यो रे बादल तू ने छूआ  मेरा हाथ क्या?

2-आवाज़ थी कल यही, फिर भी ऐसे लहकती ना देखी
पग में थी पायल मगर, फिर भी ऐसे छनकती ना देखी
चंचल हो गये घुँगरू मेरे रातोरात क्या!

3-मस्ती से बोझल पवन, जैसे साया कोई मन पे डोले
बरखा की हर बूँद पे, थरथरी सी मेरे तन पे डोले
पागल मौसम जा रे तू, लगा मेरे साथ क्या!
 ओ घटा साँवरी, ......
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Cover song---Vocals- Alpana
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विडियो
 
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Aug 21, 2017

लग जा गले के फिर ये ...फिल्म: वो कौन थी ?

फिल्म : वो कौन थी ?
गीतकार -राजा मेहदी अली खान
संगीतकार -मदन मोहन
मूल गायिका :  लता मंगेशकर

प्रस्तुत गीत में स्वर - अल्पना वर्मा
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 lyrics-Lag ja gale se
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लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से ...

१.हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले ....................

२.पास आइये कि हम नहीं आएँगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार कि बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो

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Aug 16, 2017

ढ़लती जाए रात ...फिल्म: रज़िया सुल्तान


फिल्म- रज़िया सुल्तान [१९६१]
मूल गायक : रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: लच्छी राम
गीतकार: आनंद  बख्शी
प्रस्तुत गीत में स्वर - सफ़ीर और अल्पना
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गीत के बोल -

ढ़लती  जाए रात कह ले दिल की बात
शमा-परवाने का न होगा फिर साथ
ढलती जाए रात …

१.मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमाँ हैं ये सारे
उठ जाएगी शब की महफ़िल नूर-ए-सहर के सुनके नक्कारे
हो न हो दुबारा मुलाक़ात
ढ़लती  जाए रात …

२.नींद के बस में खोई-खोई कुल दुनिया है सोई-सोई
ऐसे में भी जाग रहा है हम-तुम जैसा कोई-कोई
क्या हसीं है तारों की बारात
ढ़लती जाए रात …

जो भी निग़ाहें चार है करता उसपे ज़माना वार है करता
हूँ राह-ए-वफ़ा का बन के राही फिर भी तुम्हें दिल प्यार है करता
बैठा ना हो ले के कोई घात
ढ़लती जाए रात …
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Aug 10, 2017

साज़-ए-दिल छेड़ दे -फ़िल्म: पासपोर्ट (1961)

फ़िल्म: पासपोर्ट (1961)
 मूल गायक: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: फारुख कैसर

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प्रस्तुत गीत में स्वर -सफ़ीर  और अल्पना
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Saaze Dil chhed de-
Lyrics :


साज़-ए-दिल छेड़ दे
क्या हसीं रात है
कुछ नहीं चाहिए
तू अगर साथ है
साज़-ए-दिल छेड़ दे …

मुझे चाँद क्यूँ तकता है
मेरा कौन ये लगता है
मुझे शक़ यही होता है
मेरे चाँद से जलता है
हमें इसकी क्या परवाह है
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …

तेरे दर पे सर झुक जाए
यहीं ज़िन्दगी रुक जाए
कली दिल की ये खिल जाए
ख़ुशी प्यार की मिल जाए
कभी फिर ग़मी न आए
साज़-ए-दिल छेड़ दे  …
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