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खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Aug 21, 2016

कदम्ब का पेड़ [कविता ]

कविता पाठ -


स्वर : अल्पना वर्मा
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कदम्ब का पेड़ [कविता] -:
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                        -सुभद्रा कुमारी चौहान

यह कदम्ब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे।
मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे।।

ले देतीं यदि मुझे बाँसुरी  तुम दो पैसे वाली।
किसी तरह नीची हो जाती यह कदंब की डाली।।

तुम्हें नहीं कुछ कहता पर मैं चुपके-चुपके आता।
उस नीची डाली से अम्मा ऊँचे पर चढ़ जाता।।

वहीं बैठ फिर बड़े मजे से मैं बाँसुरी  बजाता।
अम्मा-अम्मा कह वंशी के स्वर में तुम्हें बुलाता।।

सुन मेरी बंसी को माँ तुम इतनी खुश हो जाती।
मुझे देखने काम छोड़ कर तुम बाहर तक आती।।

तुमको आता देख बाँसुरी  रख मैं चुप हो जाता।
पत्तों में छिपकर धीरे से फिर बाँसुरी बजाता।।

गुस्सा होकर मुझे डांटती  , कहती "नीचे आजा"।
पर जब मैं ना उतरता,हँसकर कहती "मुन्ना राजा"।।

"नीचे उतरो मेरे भैया तुम्हें मिठाई दूँगी।
नए खिलौने, माखन-मिसरी, दूध मलाई दूँगी "।।

मैं हँसकर सबसे ऊपर की टहनी पर चढ़  जाता।
एक बार माँ कह  पत्तों में वहीँ कहीं छुप जाता ।।

बहुत बुलाने पर भी माँ जब नहीं उतर कर आता।
माँ, तब माँ का हृदय तुम्हारा बहुत विकल हो जाता।।

तुम आँचल फैला कर अम्मा वहीं पेड़ के नीचे।
ईश्वर से कुछ विनती करतीं बैठी आँखें मीचे।।

तुम्हें ध्यान में लगी देख मैं धीरे-धीरे आता।
और तुम्हारे फैले आँचल के नीचे छिप जाता।।

तुम घबरा कर आँख खोलतीं, पर माँ खुश हो जाती।
जब अपने मुन्ना राजा को गोदी में ही पातीं।।

इसी तरह कुछ खेला करते हम-तुम धीरे-धीरे।
माँ  कदंब का पेड़ अगर यह  होता यमुना तीरे।।

--सुभद्रा कुमारी चौहान

Aug 19, 2016

आ आ भी जा -फिल्म : तीसरी क़सम

फिल्म-तीसरी क़सम
मूल गायिका -लता मंगेशकर
संगीतकार-शंकर जयकिशन
गीतकार -शैलन्द्र
अभिनेत्री-वहीदा रहमान
प्रस्तुति कवर संस्करण -अल्पना

गीत के बोल [lyrics]
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रहेगा इश्क़ तेरा ख़ाक में मिलाके मुझे
हुए हैं इब्तिदा में रंज इन्तिहा के मुझे
आ आ भी जा
रात ढलने लगी, चाँद छुपने चला
आ आ भी जा

१.तेरी याद में बेख़बर, शमा की तरह रातभर
जली आरज़ू दिल जला
आ आ भी जा …

2.उफ़क़ पर खड़ी है सहर, अँधेरा है दिल में इधर
वही रोज़ का सिलसिला
आ आ भी जा …

3.सितारों ने मुँह फेरकर, कहा अलविदा हमसफ़र
चला कारवाँ फिर चला
आ आ भी जा …


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Vocals-Alpana
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चेतक की वीरता -कविता पाठ

यह कविता हिंदी कवि श्याम सुन्दर सह्रमा जी की लिखी हुई है,एक प्रयास है अपने स्वर में इसे प्रस्तुत करने का..

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Aug 18, 2016

लूटे कोई मन का नगर -फिल्म: अभिमान


फिल्म : अभिमान
गायक- लता मंगेशकर, मनहर
संगीतकारः एस. डी. बर्मन
गीतकारः मज़रूह सुल्तानपुरी
प्रस्तुति : अल्पना वर्मा और संतोष

गीत के बोल 

लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी

कौन है वो अपनों में कभी ऐसा कहीं होता हाई
ये तो बड़ा धोखा है
लूटे कोई मन का नगर बन के मेरा साथी
१.यहीं पे कहीं है मेरे मन का चोर
नज़र पड़े तो बैयाँ दूँ मरोड़ - 2
जाने दो जैसे तुम प्यारे हो
वो भी मुझे प्यारा है जीना का सहारा है

देखोजी तुम्हारी यही बतियां मुझको हैं तडपाती
लूटे कोई मन का नगर बनके मेरा साथी

2.रोग मेरे जी का मेरे दिल का चैन
साँवला सा मुखड़ा उस पे काले नैन -2
ऐसे को रोके अब कौन भला
दिल से जो प्यारी है सजना हमारी है
कहा  करूँ मैं बिन उसके रह भी नहीं पाती
लूटे कोई मन का नगर बनके मेरा साथी
लूटे कोई मन का....

Cover Sung by Alpana Verma & Santosh Soni
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Aug 17, 2016

अभी न जाओ छोड़कर -फिल्म: हम दोनों

फिल्म : हम दोनों (1961)
संगीतकार : जयदेव
गीतकार : साहिर लुधियानवी
मूल गायक : मो.रफ़ी, आशा भोसले
 गीत के बोल /lyrics

प्रस्तुत गीत में स्वर -ताहे नाना और अल्पना वर्मा

अभी ना जाओ छोड़कर, के दिल अभी भरा नहीं

१.अभी-अभी तो आई हो, अभी-अभी तो
अभी-अभी तो आई हो, बहार बन के छाई हो
हवा ज़रा महक तो ले, नज़र ज़रा बहक तो ले
ये शाम ढल तो ले ज़रा, ये दिल सम्भल तो ले ज़रा
मैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूँट पी तो लूँ
अभी तो कुछ कहा नहीं, अभी तो कुछ सुना नहीं
अभी ना जाओ छोड़कर...

2.सितारे झिलमिला उठे, चराग़ जगमगा उठे
बस अब न मुझको टोकना, न बढ़ के राह रोकना
अगर मैं रुक गई अभी, तो जा न पाऊँगी कभी
यही कहोगे तुम सदा, के दिल अभी नहीं भरा
जो खत्म हो किसी जगह, ये ऐसा सिलसिला नहीं
अभी नहीं, अभी नहीं, नहीं नहीं नहीं नहीं
अभी ना जाओ छोड़कर...

3.अधूरी आस छोड़ के, अधूरी प्यास छोड़ के
जो रोज़ यूँ ही जाओगी, तो किस तरह निभाओगी
कि ज़िंदगी की राह में, जवाँ दिलों की चाह में
कई मक़ाम आएंगे, जो हमको आज़माएंगे
बुरा न मानो बात का, ये प्यार है गिला नहीं
हाँ, यही कहोगे तुम सदा, के दिल अभी भरा नहीं
हाँ, दिल अभी भरा नहीं, नहीं नहीं नहीं नहीं
Mr Tahy Nana is an international fame Arabic singer,a fan of Rafi Sb.
I got his vocals with tracks and was asked to complete.
Thanks Tahy ji for selecting such a beautiful duet,
Cover singers-Tahy Nana & Alpana Verma



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Aug 16, 2016

रात के हमसफ़र थक के ...

गीत-रात के हमसफ़र थक के...



फिल्म -एन इवनिंग इन पेरिस
संगीत -शंकर -जयकिशन
गीतकार -शैलेन्द्र
मूल गायकी-रफ़ी -आशा
प्रस्तुत कवर गायक- सफीर और  अल्पना

गीत के बोल  Song lyrics
रात के हमसफ़र, थक के घर को चले
झूमती आ रही, है सुबह प्यार की
देख कर सामने रूप की रौशनी
फिर लुटी  जा रही, है सुबह प्यार की

१.सोने वालों को हँस कर जगाना भी है
रात के जागतों को सुलाना भी है
देती हैं जागने की सदा साथ ही
लोरियाँगा रही है, सुबह प्यार की

2.रात ने प्यार के जाम, भर कर दिए
आँखों आँखों से जो मैंने तुमने पिए
होश तो अब तलक जा के लौटे नहीं
और क्या ला रही है, सुबह प्यार की

क्या क्या वादे हुए, किसने खाई कसम
इस नयी राह पर, हम ने रखे कदम
छुप  सका प्यार कब, हम छुपाये तो क्या
सब समझ पा रही है, सुबह प्यार की
रात के ......
 cover singers-Safeer & Alpana
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Aug 14, 2016

खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ
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-[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ]


Kavita Paath: Alpana Verma


सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।


लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार।
महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।


हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
अश्रुपूर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी रोयीं रिनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
'नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।
यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।
हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों में।
ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
-सुभद्रा कुमारी चौहान
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Aug 10, 2016

देशभक्ति समूह गीत -patriotic group song


प्रस्तुत है एक  देशभक्ति समूह गीत जिसे मैंने छात्राओं से  एक प्रतियोगिता हेतु तैयार करवाया था -


गीत-

कोटि कोटि कंठों ने गाया माँ का गौरव गान है
एक रहें हैं एक रहेंगे भारत की संतान हैं

आशा है आपको पसंद आएगा.
[गीत के पूरे बोल जल्द ही लिखूँगी]..अभी सिर्फ गीत सुनिये...

Aug 9, 2016

हो गई है पीर -ग़ज़ल

गैर फ़िल्मी ग़ज़ल ..

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
- दुष्यन्त कुमार
Voice: Alpana Verma


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कविता पाठ-अल्पना वर्मा
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Aug 4, 2016

तुझे देखा तो ये ...

फिल्म- दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे
संगीत-जतिन-ललित
गीतकार-आनंद बक्षी
मूल गायक -लता जी और कुमार सानू
प्रस्तुत गीत में स्वर-संतोष सोनी और अल्पना

गीत के बोल -

तुझे देखा तो ये जाना सनम
प्यार होता है दीवाना सनम
अब यहाँ से कहाँ जाएँ हम
तेरी बाँहों में मर जाएँ हम
तुझे देखा तो ये जाना सनम...

आँखें मेरी, सपने तेरे
दिल मेरा, यादें तेरी
हो मेरा है क्या, सब कुछ तेरा
जाँ तेरी, साँसें तेरी
मेरी आँखों में आँसू तेरे आ गए
मुस्कुराने लगे सारे ग़म
तुझे देखा तो ये जाना सनम...

ये दिल कहीं, लगता नहीं
क्या कहूँ, मैं क्या करूँ
हाँ, तु सामने, बैठी रहे
मैं तुझे देखा करूँ
तूने आवाज़ दी, देख मैं आ गई
प्यार से है बड़ी क्या क़सम
तुझे देखा तो ये जाना सनम...
Mp3 Download Here

Voices in this song-Santosh Soni &Alpana Verma
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Aug 2, 2016

परबत के इस पार :फिल्म-सरगम

गीत-परबत के इस पार...
गीतकार-आनंद  बक्षी
संगीतकार-लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल
मूल गायक-लता और रफ़ी
प्रस्तुत है इस गीत का कवर संस्करण

गीत के बोल-

पर्वत के इस पार पर्वत के उस पार
गूँज उठी छम-छम छम-छम
गूँज उठी छम-छम छम मेरी पायल की झंकार


१.मुख पे पड़ी थी कब से चुप की इक ज़ंजीर
मंदिर में चुप-चाप खड़ी थी मैं बनके तस्वीर
आ चल गा मैं साथ हूँ तेरे
छेड़ दिए हैं सरस्वती देवी ने तार-सितार
पर्वत के इस पार …

2.ग़म इक चिट्ठी जिसमें ख़ुशियों का सन्देश
गीत तभी मन से उठता है जब लगती है ठेस
आ चल गा मैं साथ हूँ तेरे
लय न टूटे ताल न टूटे छूटे ये संसार
पर्वत के इस पार …

3.फूल बने हैं घुँघरू घुँघरू बन गए फूल
टूट के पाँव में सब कलियाँ बिछ गईं बनकर धूल
ता थैया ता ता थैया
देखो झूम के नाच उठी है
मेरे अंग अंग मस्त बहार
पर्वत के इस पार …

प्रस्तुत गीत में स्वर -सफीर अहमद और अल्पना वर्मा
Cover by Safeer & Alpana

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Aug 1, 2016

ढ़लती जाए रात -युगल गीत

गीत -ढ़लती जाए रात
फिल्म-रज़िया सुल्तान
मूल गायक -मो. रफ़ी और आशा भोसले
गीतकार -आनंद बक्षी
संगीतकार -लच्छीराम



गीत के बोल-

ढ़लती जाए रात कह ले दिल की बात
शम्मा परवाने का न होगा फिर साथ

१.मस्त नज़ारे चाँद सितारे रात के मेहमान हैं ये सारे
उठा जायेगी शब की महफ़िल नूरे सहर के सुनके नकारे
हो न हो दोबारा मुलाकात

2.नींद के बस में खोयी खोयी ,कुल दुनिया है सोयी सोयी
ऐसे में भी जाग रहा है हम तुम जैसा कोई कोई
क्या हसीं है तारों की बारात

3.जो भी निगाहें चार है करता उसपे ज़माना वार है करता
राहे वफा का बनके साथी फिर भी तुम्हें दिल प्यार है करता
बैठा न हो ले के कोई घात ..

ढ़लती  जाए रात ...प्रस्तुत गीत में स्वर -सफ़ीर और अल्पना
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Mp3 डाउनलोड यहाँ कर सकते हैं.