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खूब लड़ी मर्दानी ....झाँसी की रानी कविता -

झाँसी  की रानी -कविता पाठ =================== -[सुभद्रा कुमारी चौहान जी की लिखी ] Kavita Paath: Alpana Verma सिंहासन हिल उठे...

Aug 9, 2017

अच्छा जी, मैं हारी .... ..काला पानी (1958)

अच्छा जी, मैं हारी .... ..
फिल्म-काला पानी (1958)
संगीतकार -एस.डी.बर्मन
गीतकार-मजरूह सुल्तानपुरी
मूल गायक -मो.रफ़ी, आशा भोसले
प्रस्तुत गीत में स्वर - अल्पना और सफ़ीर
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गीत के बोल
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अच्छा जी मैं हारी, चलो, मान जाओ ना
देखी सबकी यारी, मेरा दिल, जलाओ ना

१.छोटे से क़ुसूर पे, ऐसे हो खफ़ा
रूठे तो हुज़ूर थे, मेरी क्या खता
देखो दिल ना तोड़ो,छोड़ो हाथ छोड़ो
छोड़ दिया तो हाथ मलोगे, समझे..
अजी समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

२.जीवन के ये रास्ते, लम्बे हैं सनम
काटेंगे ये ज़िंदगी, ठोकर खा के हम
ज़ालिम साथ ले ले ,अच्छे हम अकेले
चार कदम भी चल न सकोगे, समझे?हाँ ,समझे...
अच्छा जी मैं हारी, चलो...

३.जाओ रह सकोगे ना, तुम भी चैन से
तुम तो खैर लूटना जीने के मज़े
क्या करना है जी के,हो रहना किसी के
हम ना रहे तो याद करोगे, समझे?समझे!
अच्छा जी मैं हारी, चलो...
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1 comment:

Safeer Ahmad said...

Thanks for this memorable collaboration